FIFA World Cup 2026 में फिर इतिहास रचेगा मोरक्को ?

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 10-06-2026
Will Morocco make history again at the 2026 FIFA World Cup?
Will Morocco make history again at the 2026 FIFA World Cup?

 

आवाज द वाॅयस / रियाद

जब भी फीफा वर्ल्ड कप 2026 में किसी संभावित डार्क हॉर्स टीम की चर्चा होगी, तो मोरक्को का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा। कतर में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप 2022 में मोरक्को ने जो करिश्मा किया था, उसने विश्व फुटबॉल की स्थापित धारणाओं को बदल दिया था। अब सवाल यह है कि क्या अरब दुनिया का यह देश एक बार फिर फुटबॉल जगत को चौंका सकता है?

मोरक्को की 2022 विश्व कप यात्रा आधुनिक फुटबॉल के सबसे प्रेरणादायक अध्यायों में गिनी जाती है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले बहुत कम विशेषज्ञों ने कल्पना की थी कि यह अफ्रीकी और अरब देश सेमीफाइनल तक पहुंचेगा। लेकिन मैदान पर मोरक्को ने जो प्रदर्शन किया, उसने हर भविष्यवाणी को गलत साबित कर दिया।
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कतर विश्व कप में मोरक्को को क्रोएशिया, बेल्जियम और कनाडा जैसे मजबूत देशों के साथ ग्रुप एफ में रखा गया था। अधिकतर विश्लेषकों का मानना था कि क्रोएशिया और बेल्जियम आसानी से अगले दौर में पहुंच जाएंगे। लेकिन मोरक्को ने शुरुआत से ही अलग कहानी लिखनी शुरू कर दी।

पहले मुकाबले में क्रोएशिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलकर टीम ने अपनी रक्षात्मक मजबूती दिखाई। इसके बाद बेल्जियम पर 2-0 की जीत ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रोमैँ साइस और जकारिया अबूखलाल के गोलों ने यह साफ कर दिया कि मोरक्को केवल भाग लेने नहीं आया है, बल्कि इतिहास बनाने निकला है।

उस समय अचरफ हकीमी, सोफियान अमराबत और गोलकीपर यासीन बूनू जैसे खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। कनाडा पर 2-1 की जीत के साथ मोरक्को ग्रुप में शीर्ष स्थान पर रहा और तीन दशक से अधिक समय बाद नॉकआउट चरण में पहुंचा।

राउंड ऑफ 16 में उसका सामना स्पेन से हुआ। स्पेन के पास अनुभवी और विश्वस्तरीय खिलाड़ियों की लंबी सूची थी। गेंद पर नियंत्रण पूरी तरह स्पेन के पास रहा। उन्होंने हजार से अधिक पास पूरे किए। लेकिन मोरक्को की अनुशासित रक्षापंक्ति ने उन्हें कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

यासीन बूनू ने कई महत्वपूर्ण बचाव किए। निर्धारित समय और अतिरिक्त समय तक मुकाबला गोलरहित रहा। पेनल्टी शूटआउट में मोरक्को ने स्पेन को 3-0 से हराकर फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक को अंजाम दिया। कप्तान अचरफ हकीमी की निर्णायक पेनल्टी आज भी फुटबॉल प्रशंसकों को याद है।

इसके बाद क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के सामने पुर्तगाल की चुनौती थी। पुर्तगाल के पास क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसा दिग्गज खिलाड़ी मौजूद था। अधिकांश लोगों को लगा कि यहीं मोरक्को का सपना समाप्त हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

यूसुफ एन नेसरी के शानदार हेडर ने मोरक्को को बढ़त दिलाई। पूरी टीम ने अंत तक उस बढ़त को बचाए रखा। अंतिम सीटी बजते ही मोरक्को फीफा विश्व कप के इतिहास में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाला पहला अरब और पहला अफ्रीकी देश बन गया। दूसरी ओर क्रिस्टियानो रोनाल्डो की आंखों में आंसू थे और दुनिया मोरक्को की कहानी सुन रही थी।

हालांकि सेमीफाइनल में फ्रांस ने मोरक्को की यात्रा रोक दी, लेकिन तब तक एटलस लायंस दुनिया का सम्मान जीत चुके थे।

अब फीफा वर्ल्ड कप 2026 में परिस्थितियां कुछ अलग हैं। टीम के आसपास उम्मीदें पहले से कहीं अधिक हैं। सबसे बड़ा बदलाव कोचिंग स्टाफ में हुआ है। वालिद रेगरागुई अब टीम के साथ नहीं हैं। उनकी जगह मोहम्मद औहबी ने कमान संभाली है।

औहबी को युवा खिलाड़ियों को निखारने वाला कोच माना जाता है। उन्होंने मोरक्को की युवा टीमों के साथ उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी रणनीति रेगरागुई की तुलना में अधिक आक्रामक और सकारात्मक मानी जाती है। माना जा रहा है कि वह टीम को तेज आक्रमण, विंग प्ले और अधिक गोल करने वाली शैली की ओर ले जाना चाहते हैं।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर टीम की संरचना में दिखाई दे सकता है। मोरक्को अब केवल मजबूत डिफेंस पर निर्भर रहने के बजाय मैच पर नियंत्रण बनाने की कोशिश करेगा। हालांकि नई रणनीति को पूरी तरह लागू करने के लिए समय चाहिए और यही टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती भी है।

मोरक्को के लिए एक और दिलचस्प पहलू युवा प्रतिभाओं का उदय है। 18 वर्षीय मिडफील्डर अयूब बुआद्दी को भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है। उनकी मौजूदगी संकेत देती है कि मोरक्को केवल पुराने नायकों पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि नई पीढ़ी को भी आगे लाना चाहता है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप चरण में मोरक्को को ब्राजील, स्कॉटलैंड और हैती के साथ रखा गया है। कागज पर देखा जाए तो ब्राजील सबसे मजबूत टीम है, लेकिन स्कॉटलैंड और हैती के खिलाफ मोरक्को के पास अच्छे अवसर होंगे। यदि टीम अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर खेलती है, तो नॉकआउट चरण में पहुंचना मुश्किल नहीं माना जा रहा।

फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मोरक्को को अंडरडॉग का लाभ नहीं मिलेगा। 2022 में प्रतिद्वंद्वी टीमें उन्हें हल्के में ले रही थीं। अब हर टीम जानती है कि मोरक्को बड़े मंच पर कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

यही कारण है कि 2026 का विश्व कप मोरक्को के लिए अलग तरह की परीक्षा है। इस बार लक्ष्य केवल दुनिया को चौंकाना नहीं है। लक्ष्य यह साबित करना है कि 2022 कोई संयोग नहीं था।
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यदि अचरफ हकीमी, यासीन बूनू, सोफियान अमराबत और युवा खिलाड़ियों का संतुलन सही बैठता है, तो मोरक्को फिर से लंबी दौड़ तय कर सकता है। शायद सेमीफाइनल तक पहुंचना आसान न हो, लेकिन इतना तय है कि विश्व फुटबॉल की बड़ी ताकतों के लिए मोरक्को एक बार फिर गंभीर खतरा बनने जा रहा है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अरब देशों की सबसे बड़ी उम्मीदें एक बार फिर एटलस लायंस के कंधों पर होंगी। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या मोरक्को इतिहास दोहराएगा या फिर एक नया इतिहास लिखेगा।