अनीस अब्बासी
लोकसभा में आज वक्फ बोर्ड अधिनियम संशोधन बिल के पास होने से देश के मुसलमानों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है, विशेष रूप से उन मुस्लिम समुदायों में जो गरीब और पिछड़ी जाति से आते हैं और अपने अधिकार से वंचित हैं. मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक कदम से न केवल मुस्लिम समाज को फायदा पहुंचेगा, बल्कि देश की विरासतें भी विकसित होंगी, साथ ही वक्फ बोर्ड में फैले कई वर्षों के भ्रष्टाचार को भी समाप्त किया जाएगा.
जैसा कि वक्फ बोर्ड अधिनियम संशोधन बिल को लेकर विपक्ष के नेताओं ने सिर्फ अपने वोट बैंक के लिए गंदी और ओछी राजनीति की, जो भविष्य में एक बड़ा खतरा बन सकती है. इस संदर्भ में केंद्र सरकार को इसी तरह निरंतर कड़े फैसले लेने चाहिए, ताकि राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार पूरी तरह से समाप्त हो सके और आम जनता को उसका हक मिल सके.
अगर हम वक्फ बोर्ड अधिनियम संशोधन बिल की बात करें, तो जिस दिन यह निर्णय लिया गया, उस दिन देश के विभिन्न राज्यों में हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने खुशी मनाई और मिठाइयां बांटकर मोदी जी को धन्यवाद दिया। ये लोग वाकई में इस बिल के पास होने से बेहद उत्साहित थे.
उनके चेहरों पर मुस्कान थी क्योंकि उन्हें यह एहसास हो गया था कि इस बिल के पास होने से उन्हें वह लाभ मिलेगा, जिसके वे असली हकदार हैं. वर्षों से वे सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक की राजनीति का शिकार हो रहे थे, लेकिन अब वे उस दिन के करीब पहुंच चुके हैं जब उन्हें उनका अधिकार मिलेगा, और वे देश की मुख्यधारा में अपना योगदान दे सकेंगे. वे अब सरकार से सीधे संवाद कर सकेंगे.
अब आवश्यकता इस बात की है कि भविष्य में इस प्रकार के कानूनों को और भी सख्त किया जाए, ताकि राजनीतिक षड्यंत्र रचने वाले लोगों का वर्चस्व पूरी तरह से समाप्त हो सके. जो लोग देश की गरीब जनता को सिर्फ अपने वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करते हैं, उनके मंसूबों का खत्म होना ही बेहतर है.
वैसे, जिस प्रकार वक्फ बोर्ड अधिनियम कानून सदन में पास हुआ है, उससे यह प्रतीत होता है कि जितना समय, जितनी बहस और जितने आरोप विपक्षी नेताओं ने लगाए, वह पूरी तरह से समय की बर्बादी थी. यदि विपक्ष अपना ध्यान और समय अपने देश और क्षेत्र के उद्धार में लगाता, तो आम जनता का जीवन सफल हो सकता था.
अनीस अब्बासी
(अल्पसंख्यक मोर्चा दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष.यह लेखक के अपने विचार हैं.)