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हम मेव मुस्लिम जरूर हैं, मगर हमारी रगों में राम और कृष्ण का खून हैः सफिया जुबैर

Story by  एटीवी | Published by  rakesh@awazthevoice.in | Date 02-03-2023
सफिया जुबैर
सफिया जुबैर

 

जयपुर. राजस्थान की कांग्रेस विधायक सफिया जुबैर ने खुद को और मेव समाज को राम और कृष्ण की संतान बताया. उन्होंने कहा कि अलवर, भरतपुर, नूह और मथुरा में मेव समाज के लोग रहते हैं. भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था. अलवर जिले की रामगढ़ सीट से विधायक सफिया जुबैर ने कहा कि उन्हें एक वंशावली से यह इतिहास मिला है. जानना चाहते हैं कि मेव समाज का अतीत क्या है? इतिहास में पता चलता है कि मेव मुस्लिम राम और कृष्ण की संतान है. धर्म जरूर बदल गया है, लेकिन खून नहीं बदला है. खून राम और कृष्ण का है.

विधायक सफिया ने कहा, ‘‘आप देखिए कि हम 10 साल में कहां हैं. अब हम यहां तीन विधायक पहुंच गए हैं, लोग और भी आगे बढ़ेंगे.’’ सफिया के इस दावे के बाद कई सदस्यों ने सदन में मेजें थपथपाई. रामगढ़ की विधायक सफिया इससे पहले सावन के महीने में तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने मंत्री शकुंतला रावत के साथ भगवान शिव की पूजा की थी. उन्होंने सोशल मीडिया पर शिव मंदिर में पूजा की तस्वीरें भी शेयर कीं थीं.

विधायक सफिया जुबैर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव जुबैर खान की पत्नी हैं. सफिया के पिता मुहम्मद उस्मान भारतीय सेना में थे. गौरतलब है कि मेव समुदाय उत्तर-पश्चिम भारत में रहता है. ये हरियाणा के मेवात में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. मेवात में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के इन लोगों को मेवाती कहा जाता है. मेव अपने धर्म इस्लाम को पसंद करते हैं. साथ ही हिंदू धर्म से जुड़ी परंपराओं का भी सम्मान करते हैं. मेव मुस्लिमों में अभी तक गोत्र और पाल परंपरा जारी है.

मेव मुस्लिम बड़ी शान से इस बात को अक्सर उद्धृत करते हैं कि उनके राजा हसन खां मेवाती ने बाबर को मुस्लिम होने के बावजूद युद्ध में साथ नहीं दिया था, बल्कि हसन खां मेवाती अपनी राजपूत बिरादरी के राणा सांगा की तरफ से बाबर के खिलाफ युद्ध लड़े थे.

मेव यूपी के मथुरा जिले के कुछ हिस्सों में सदियों से रह रहे हैं. ये लोग हरियाणा और राजस्थान के नोह में भी पाए जाते हैं. इन्हें मेव राजपूत भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि मेव हिंदू राजपूत, जाट, अहीर और मीना थे, जो 12वीं शताब्दी के मध्य में इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे. उन्हें पूरे इतिहास में एक बहादुर कौम माना जाता रहा है. वे ओबीसी में शामिल हैं और उनकी संख्या 30 लाख से अधिक है. जिनमें से 20 लाख हरियाणा राज्य में रहते हैं. मेव पाकिस्तान में भी रहते हैं.

 

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