नई दिल्ली. होठों से हंसी का खत्म हो जाना हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी है. समाज की गंभीरता और हंसी दोनों ही कृत्रिम हो गई हैं. हँसने की क्षमता ईश्वर की ओर से एक महान वरदान है. हास्य तब पैदा होता है, जब हँसी साहित्यिक अभिव्यक्ति का रूप ले लेती है. जीवन की असमानता ही हास्य की मुख्य प्रेरणा है. व्यंग्य और हास्य का मुख्य उद्देश्य समाज का शुद्धिकरण है. व्यंग्य बाहर से विनाशकारी लेकिन भीतर से रचनात्मक होता है. हास्यास्पद घटनाएं, हास्यास्पद चरित्र, विकृतियां, असंभव शब्द और अतिशयोक्तिपूर्ण कथन व्यंग्य और हास्य की महत्वपूर्ण युक्तियां हैं. ये विचार प्रोफेसर मजहर अहमद (जाकिर हुसैन कॉलेज, शबीना) ने जामिया मिलिया इस्लामिया के उर्दू विभाग द्वारा आयोजित ‘व्यंग्य और हास्य के मूल सिद्धांत’ विषय पर एक विस्तृत प्रवचन में व्यक्त किए.
सैपलिंग से आए अतिथि वक्ता का स्वागत करते हुए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कौसर मजहरी ने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक स्मरणोत्सव एवं विस्तारित प्रवचन एक स्वर्णिम परंपरा रही है, इसलिए इस सप्ताह भी प्रमुख लेखकों एवं बुद्धिजीवियों के आगमन और उनके प्रामाणिक प्रवचनों का सिलसिला जारी है.
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रोफेसर शहजाद अंजुम ने अतिथि वक्ता की विद्वत्तापूर्ण गुणवत्ता और उनके प्रवचन की उपयोगिता को स्वीकार किया, लेकिन इस बात पर खेद व्यक्त किया कि उत्कृष्ट रचनात्मकता की अभिव्यक्ति होने के बावजूद व्यंग्य और हास्य की पूंजी को गंभीर अध्ययन के योग्य नहीं माना जाता है. विस्तारित प्रवचन के संयोजक डॉ. शाह आलम ने प्रोफेसर मजहर अहमद और प्रवचन के विषय का विस्तृत परिचय दिया. कार्यक्रम की शुरुआत मुहम्मद असजद के कविता पाठ से हुई और समापन डॉ. साकिब इमरान के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.
इस अवसर पर प्रोफेसर अहमद महफूज, प्रोफेसर इमरान अहमद अंदलीब, प्रोफेसर सरवरुल हुदा, डॉ. खालिद मुबाशिर, डॉ. मुशीर अहमद, डॉ. सैयद तनवीर हुसैन, डॉ. मुहम्मद मुकीम, डॉ. आदिल हयात, डॉ. इम्तियाज वहीद, डॉ. मखमूर सादरी, डॉ. जावेद हसन, डॉ. राहिन शमा, डॉ. शादाब तबस्सुम, डॉ. नौशाद मंजर, डॉ. मुहम्मद आदम, डॉ. गजाला फातिमा, डॉ. शाहनवाज फैयाज, डॉ. हनबल रजा और मुहम्मद आरिफ के अलावा विभाग के शोधार्थी और छात्र उपस्थित थे.