वक्फ बिल पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, पर्सनल लॉ बोर्ड ने सांसदों से की अपील

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 02-04-2025
Government and opposition face to face on Waqf Bill, Personal Law Board appeals to MPs, social media file photo
Government and opposition face to face on Waqf Bill, Personal Law Board appeals to MPs, social media file photo

 

आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर संसद में बड़ा राजनीतिक घमासान होने वाला है. केंद्र सरकार इस विधेयक को बुधवार को लोकसभा में पेश करने जा रही है, जिससे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की बात कही जा रही है.

इस बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित कई मुस्लिम संगठनों ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे वक्फ कानून को कमजोर करने की साजिश बताया है.

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

विधेयक को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच टकराव तेज हो गया है. भाजपा और कांग्रेस, दोनों ने अपने सांसदों को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है.

समाजवादी पार्टी (सपा) सहित अन्य विपक्षी दलों ने भी अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने और विधेयक पर चर्चा में भाग लेने का निर्देश दिया है.विपक्षी दलों का कहना है कि इस विधेयक के पारित होने से देश में मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों पर संकट आ सकता है.

वहीं, सरकार का दावा है कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह संशोधन जरूरी है.

क्या कहता है वक्फ संशोधन विधेयक?

यह विधेयक 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखता है, जिससे वक्फ संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया को अद्यतन किया जा सके और प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाकर वक्फ रिकॉर्ड का बेहतर प्रबंधन किया जा सके. इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. वक्फ बाय यूज़र (Waqf by-user) का समाप्तिकरण – यानी, जो संपत्तियां लंबे समय से वक्फ के रूप में इस्तेमाल हो रही हैं, लेकिन उनके पंजीकरण में विवाद है, उन्हें वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा.

  2. लिमिटेशन एक्ट का प्रभाव – वर्तमान में वक्फ संपत्तियां किसी भी प्रकार के सीमांकन (Limitation) से मुक्त हैं, लेकिन इस संशोधन के बाद, सरकार और निजी पक्ष कानूनी दावों के माध्यम से वक्फ संपत्तियों पर दावा कर सकेंगे.

  3. वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति – इससे मुस्लिम संगठनों को आशंका है कि वक्फ बोर्ड पर बाहरी हस्तक्षेप बढ़ेगा और मुस्लिम समुदाय का नियंत्रण कमजोर होगा.

  4. वक्फ ट्रिब्यूनल की शक्तियों में कटौती – अब वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों का निपटारा कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट (DM) के माध्यम से किया जाएगा, जिससे प्रशासन के पक्षपाती रवैये का खतरा बढ़ सकता है.

मुस्लिम समुदाय की चिंताएं और विरोध

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए संसद सदस्यों से इसके विरोध में मतदान करने की अपील की है.

उन्होंने कहा,"बीजेपी सरकार इस विधेयक के जरिए वक्फ संपत्तियों को कमजोर कर उन्हें हड़पने का रास्ता साफ़ कर रही है. प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के बावजूद हर मस्जिद को विवादित बनाने की साजिशें हो रही हैं. यदि यह संशोधन पास हो जाता है, तो वक्फ संपत्तियों पर सरकारी और गैर-सरकारी दावों की बाढ़ आ जाएगी."

उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के खिलाफ़ है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार की गारंटी देता है.

 

विपक्ष की रणनीति और भारत ब्लॉक की बैठक

विपक्षी दलों ने मंगलवार को संसद में बैठक कर वक्फ संशोधन विधेयक पर रणनीति तैयार की. कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके, आरजेडी और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया और कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को कमजोर करने की साजिश है.

समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में पार्टी के सभी सांसदों को इस विधेयक पर चर्चा में भाग लेने के लिए तीन-पंक्ति का व्हिप जारी किया है.

क्या होगा विधेयक का भविष्य?

लोकसभा में भाजपा के बहुमत को देखते हुए संभावना है कि यह विधेयक आसानी से पारित हो जाएगा. हालांकि, राज्यसभा में सरकार को कड़ी चुनौती मिल सकती है, जहां विपक्षी दलों की संख्या अधिक है.

इस विधेयक को लेकर देशभर में मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन भी जारी हैं. कई शहरों में इस मुद्दे को लेकर धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं.

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर देश की सियासत गरमा गई है. जहां सरकार इसे पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक कदम बता रही है, वहीं मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों का मानना है कि यह विधेयक समुदाय के धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है.

अब सबकी निगाहें संसद पर टिकी हैं कि क्या विपक्ष इसे रोकने में सफल होता है या फिर सरकार इसे पारित कराकर नया कानून लागू कर देती है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर देशभर में और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं.