रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीन पर्वतारोहण अभियानों को हरी झंडी दिखाई

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 03-04-2025
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीन पर्वतारोहण अभियानों को हरी झंडी दिखाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीन पर्वतारोहण अभियानों को हरी झंडी दिखाई

 

नई दिल्ली

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को तीन पर्वतारोहण अभियानों को हरी झंडी दिखाई.इन तीन अभियानों में कंचनजंगा के लिए भारत-नेपाल पर्वतारोहण अभियान, एवरेस्ट के लिए भारतीय सेना पर्वतारोहण अभियान और राष्ट्रीय कैडेट कोर के लड़कों और लड़कियों के पर्वतारोहण अभियान शामिल हैं.

अधिकारियों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय (MoD) ने आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड, फोर्स मोटर्स लिमिटेड और महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत एंटी-टैंक हथियार प्लेटफॉर्म के नाग मिसाइल सिस्टम (NAMIS) के ट्रैक किए गए संस्करण की खरीद की जाएगी और सशस्त्र बलों के लिए लगभग 5,000 हल्के वाहनों की खरीद की जाएगी. इन अनुबंधों की कुल लागत लगभग 2,500 करोड़ रुपये है.

रक्षा पीआरओ के मुताबिक, 27 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में इन खरीदारी अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए. ये अनुबंध भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित श्रेणी के तहत किए गए हैं.

डीआरडीओ के रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला द्वारा विकसित एनएएमआईएस (टीआर) हथियार प्रणाली की खरीद के लिए अनुबंध की कुल लागत 1,801.34 करोड़ रुपये है. यह प्रणाली भारतीय सेना के मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की टैंक रोधी क्षमता को आधुनिक बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सेना की परिचालन तत्परता को बढ़ाएगा.

एनएएमआईएस (टीआर) दुश्मन के कवच के खिलाफ सबसे अत्याधुनिक एंटी-टैंक हथियार प्रणालियों में से एक है. इसमें फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक मिसाइल और दृष्टि प्रणाली शामिल हैं, जो बढ़ी हुई मारक क्षमता और मारक क्षमता प्रदान करती हैं. यह हथियार प्रणाली विभिन्न प्रकार के अभियानों और परिचालन स्थितियों में सशस्त्र बलों को गतिशीलता और परिचालन लाभ प्रदान करने के लिए तैयार है.

यह खरीद स्वदेशीकरण और राष्ट्रीय रक्षा उपकरण विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाएगी और साथ ही एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहित करके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी. यह देश के रक्षा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और स्वदेशी उद्योगों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है.