ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
खाड़ी से 2010 में भारत लौटने के बाद फौजिआ नाहिद ने कूड़ा बीनने वाले बस्ती के बच्चों की दशा देखी तो उन्होंने उनके भविष्य को संवारने की ठान ली. उन्होंने बस्ती के बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठाया और उनकी बस्ती में ही अपनी भी झोपड़ी बनाई. कच्ची बस्ती की झुग्गी-झोपडिय़ों में घूमकर बच्चों से दोस्ती की. बच्चों से नजदीकियां बढ़ाने के बाद उनका पढ़ाई की ओर झुकाव कराने का प्रयास शुरू किया.
जहां वे बच्चों को खले-खेल में पढ़ना-लिखना सीखाने लगी. फिर बच्चों की लगन को देखते हुए 2019 में उन्होनें एक स्कूल स्थापित किया जो आईएलएम (ILM- initiative for learning & motivation) ट्रस्ट के बैनर तले शुरू हुआ.
ILM Academy students celebrating Independence day
आईएलएम अकादमी के तीन स्कूल स्थापित हैं
स्कूल की फाउंडर फौजिआ नाहिद ने आवाज द वॉयस को बताया कि आज के समय में ग्रेटर नॉएडा में आईएलएम अकादमी के तीन स्कूल स्थापित हैं. जिसमें लगभग 200 बच्चें मुफ्त में ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं. अब स्कूल आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सीबीएससी बोर्ड (CBSE Board) के सिलेबस के तहत पढ़ाता है.
इन तीनों स्कूल में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ लंच ब्रेक में खाना भी दिया जाता है. स्कूल बच्चों की हर जरुरत का ध्यान रखता है. एडमीशन के साथ ही उन्हें दो यूनिफॉर्म्स, एक सर्दी की और एक गर्मी की दी जाती है, साथ ही उनकी बेसिक स्टेशनरी, कॉपी, साड़ी किताबें उन्हें दी जाती हैं.
स्कूल के लिए नहीं ली कभी कोई फंडिंग
फौजिआ नानाहिद ने आवाज द वॉयस को बताया कि "शुरुवात में उन्होनें केवल छोटे बच्चों को ही पेंसिल तक पकड़ना सिखाया और शिक्षा की अलक उनमें जगाई. ऐसे में उन्होनें बस्ती के बच्चों के माता-पिता को भी मनाया क्योंकि वे शुरुवात में अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए न तो जागरूक थे और न ही उन्हें शिक्षा की जरुरत ही महसूस होती थी, क्योंकि उनके बच्चें काम करते थे, पैसे कमाते थे, कूड़ा बीनकर वे अपने माँ बाप की घर चलाने में आर्थिक रूप से मदद किया करते थे.
इसीलिए बस्ती के लोगों को भी हमने पढ़ाया और समझाया, जिसके बाद वे अपने बच्चों को हमारे स्कूल भेजने लगे, ये सभी बच्चें कभी स्कूल पढ़ने नहीं गए. शायद यही कारण है कि मुझे शुरुवात में काफी महनत करनी पढ़ी लेकिन मैं कभी हारी नहीं और हमेशा यही माना कि एक शिक्षित समाज ही विकसीत समाज है.
शिक्षा के शेयर ही हम समाज में फैली कुरीतियों पर अंकुश लगा सकते हैं. शिक्षा मानव विकास की मूलभूत आवश्यकता है. शिक्षा समाज के ज्ञान, सशक्तिकरण और मुक्ति को बढ़ावा देती है. शिक्षा के बिना समाज सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा रहेगा."
उद्देश्य: समाज के वंचित लोगों को उच्च शिक्षा के जोड़ना
फौजिआ नाहिद ने आवाज द वॉयस को बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित लोगों को उच्च शिक्षा के जोड़ना है. हम तो बस गरीबों की झोपड़ी में शिक्षा की लौ जगा रहे हैं. साथ सभी बच्चों को उत्साहित करने के लिए टॉफी बिस्किट वितरित किये जाते हैं. बच्चों के मानसिक वातावरण को शुद्ध करने के लिए हम उन्हें एक्सट्रा एक्टीवीटी भी करवाते हैं.
फौजिआ नाहिद सप्ताह में एक-एक बार अपने हर स्कूल जाकर वहां का निरक्षण करतीं हैं. और ह्यदा सी अपने ग्रेटर नॉएडा में देवला में स्थित स्कूल में बितातीं हैं जहां वे बच्चों को मेथ्स और विज्ञान पढ़तीं हैं और उनके पति अंग्रेजी पढ़ाते हैं.
Students learning computer at ILM Academy, Devla
फौजिआ नाहिद ने कहा कि हमने आजतक अपने स्कूल के लिए किसी से कोई फण्ड नहीं माँगा, हम परिवार वाले मिलकर ही स्कूल की देख रेख और बच्चों की शिक्षा का सारा खर्च उठाते हैं. इसमें केवल शिक्षा ही नहीं, मेडिकल सुविधा, जरूरतमन्द छात्रों की स्कॉलरशिप और आदी सामाज हित के कार्य भी शामिल हैं. इसमें ज्यादातर बस्ती की लोग ही शामिल होते हैं जिनकी देनेक जिंदगी में हमारा ट्रस्ट अहम भूमिका निभाता है.
फौजिआ नाहिद का मानना है कि शिक्षा व्यक्ति के मानसिक और बौद्धिक पोषण विकास में मदद करती है. शिक्षा के बिना व्यक्ति बौद्धिक रूप से प्रगति नहीं कर सकता है, और काम करने के लिए कौशल और क्षमता विकसित नहीं कर सकता है.
इसीलिए वे अपने सभी छात्रों को नेशनल स्कूल से परीक्षा दिलवाने की सोच रहीं हैं और इसके आगे बच्चें अपनी क्षमता के अनुसार आगे स्कूल, कॉलेज में आगे की शिक्षा प्राप्त करने में हमारा ट्रस्ट उनकी मदद करेगा. इसमें छात्रों को ट्रेनिंग और आदि कौशल क्षेत्रों में स्किल ट्रेनिंग के बारे में भी हम सोच रहे हैं.
फौजिआ नाहिद ने आवाज द वॉयस को बताया कि उनके तीनों स्कूल सुबह 8 बजे शुरू हो जाते हैं और 1 बजे तक बच्चें क्लास में पढ़ते हैं इस बीच ब्रेक में उन्हें हम लाइट फ़ूड भी देते हैं जैसे एक दिन अंडा, ब्रेड और दूध, वहीँ दूसरे दिन समोसा, ब्रेडपकोड़ा, आदि.
फौजिया नाहिद की शैक्षणिक योग्यता
फौजिआ नाहिद ने आवाज द वॉयस को बताया कि वैसे तो वे पुरानी दिल्ली की निवासी हैं लेकिन उनकी माता भी अलीगढ़ में AMU School (मिंटो सर्कल) में उर्दू पढ़ाया करतीं थी और उनकी स्कूली शिक्षा अलीगढ़ में ही हुई इसके बाद 1983 में सोशोलॉजी में उन्होनें AMU से मास्टर्स पूरी की इसके बाद जर्नलिज्म में उन्होनें डिप्लोमा भी किया.
ILM Academy, Tugalpur, Greater Noida
फौजिआ नाहीद का वर्क लाइफ बैलेंस
फौजिआ नाहिद ने अपने वर्क लाइफ बैलेंस के बारे में बात करते हुए कहा कि मैं अपने परिवार और जानकारों की शुक्रगुजार हूँ जिन्होनें मेरी स्कूल की पहल में मेरी मदद की और इस पुरे सफर में आज भी वे सभी मेरे साथ खड़े हैं, सभी ने मेरी हर रूप में मदद की, कोई दोस्त मुफ्त में बच्चों को पढ़ाने को राजी हुआ, तो किसी ने आर्थिक मदद की, खासकर मेरे बच्चों ने भी मुझे कभी ये महसूस नहीं होने दिया कि मैं अपना समय उन्हें और घरको नहीं दे पा रहीं हूँ. वे हमेश मेरे साथ हर कदम पर खड़े हैं. यहां तक की मेरे बेटे ने भी स्कुल में बच्चों को पढ़ाया है.
साथ ही मैं उपरवाले का भी धन्यवाद अदा करती हूँ कि उन्होनें हमे इस काबिल बनाया है कि हम समाज को एक बेहतर व्यक्ति दे पायेंगे जो अपराध बोध से दूर होकर और कूड़ा बीनने की बजाय समाज की मुख्य धरा से जुड़कर विकास में अपनी भूमिका निभा पाएगा.