
आतिर ख़ान
हाल ही में एक समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में तर्क दिया गया था कि भारतीय मुस्लिम समुदाय में बुद्धिजीवियों (इंटेलेक्चुअल्स) का अभाव है। उस लेख का मुख्य निष्कर्ष यह था कि यह समुदाय अपना खुद का एक बौद्धिक वर्ग तैयार करने में विफल रहा है और राष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंताओं को उठाने के लिए, कम से कम आंशिक रूप से, हिंदू या वामपंथी-उदारवादी (लेफ्ट-लिबरल) विचारकों पर ही निर्भर रहता है।
यह एक ऐसा तर्क है जिस पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है। लगभग 20 करोड़ की आबादी वाले औ&......Read more