
शम्सुल आलम
कभी जिस बांग्लादेश में साक्षरता दर 20प्रतिशत से भी कम थी, आज वही देश शिक्षा के विस्तार की मिसाल पेश करता है। गांवों से लेकर शहरों तक स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ी है। विश्वविद्यालयों के दरवाजे पहले से ज्यादा खुले हैं। लाखों युवा अब उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। लेकिन इस चमकती तस्वीर के पीछे एक बेचैन करने वाला सवाल भी खड़ा है। क्या बांग्लादेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था सचमुच युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर पा रही है।
ढाका के निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों......Read more