
मलिक असगर हाशम/ नई दिल्ली
आज के समय में जब समाज में नफरत और सांप्रदायिकता फैलाकर अपना उल्लू सीधा करने का खेल चरम पर है, तब उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसी हकीकत सामने आई है जो इंसानियत का सिर गर्व से ऊंचा कर देती है। यह सच्ची कहानी किसी आम इंसान की नहीं बल्कि गंगा रक्षक लाल मोहम्मद बादशाह की है। उन्होंने मां गंगा की निस्वार्थ सेवा के लिए अपनी अच्छी-भली सरकारी नौकरी è...Read more
द्युतिमय बनर्जी
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साल 1939 का त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन एक ऐसा मोड़ था जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी। यह वह समय था जब कांग्रेस के भीतर दो सबसे बड़े नेताओं के बीच विचारों की लड़ाई खुलकर सामने आ गई थी। एक तरफ अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी थे और दूसरी तरफ आक्रामक राष्ट्रवाद के समर्थक नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव त्रिपुरी में हुए इस अधिवेशन ने कांग्रेस के भीतर समाजवाद और गांधीवाद के बीच की गहरी खाई को उजागर कर दिया था।
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