
मलिक असगर हाशमी
मुंबई की सड़कों पर कोई शेखी बघारे तो सुनने वाला हंसकर कह देता है,“क्या छपरी बात कर रहा है!” हरियाणा के खेतों में गपबाज़ी को “उरले-परले की” कह दिया जाता है, कोलकाता की गलियों में “जा बेटा” से बात टलती है, तो बिहार में “मारम न” की धमकी में ही एक अपनापन छुपा होता है। हर शहर की अपनी ज़बान है, अपने मुहावरे हैं।
लेकिन अगर आप पुरानी दिल्ली की तंग और ...Read more
हरजिंदर
उस समय जब दुनिया भर में इस्लामफोबिया और समुदायों की आपसी नफरत चिंता का विषय बनी हुई है ताईवान में जो हो रहा है वह उम्मीद की एक किरण देता है।पहले बात करते हैं ताईवान में रहने वाले मुसलमानों की। चीन से अलग होकर बने इस देश में मुसलमानों की आबादी बहुत कम है।
इनमें ज्यादातर वे हैं जो चीन की मुख्यभूमि से 1949 में यहां उस समय आकर बसे थे जब जब एक तरह से दोनों देशों का विभाजन हुआ था। वैसे यह विभाजन एक अलग तरह की कहानी है जिसमें दोनों ही देश अपने आप को वास्तविक चीन मानते हैं......Read more